सूरह Ash-Shams पढ़ें

सूरह Ash-Shams (الشمس) क़ुरआन की एक मक्की सूरह सूरह है जिसमें 15 आयतें हैं। हमारे इंटरैक्टिव उपकरणों से इस सूरह को पढ़ें, सुनें और हिफ़्ज़ करें।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

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सूरह Ash-Shams अंकों में

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(मक्की सूरह)
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अक्षर
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आयतें
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मुख्य शब्दों की आवृत्ति

الله 2
رب 1

सबसे अधिक आवृत्त अक्षर

ا
31
#1
ه
27
#2
و
24
#3
ل
20
#4
م
16
#5
الشمس · जुज़ 30
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سورة الشمس
जुज़ 30 65.8% (371/564)
हिज़्ब 60 33.0% (95/288)

وَٱلشَّمْسِ وَضُحَىٰهَا ﴿1﴾

सूरज की क़सम और उसकी रौशनी की

وَٱلْقَمَرِ إِذَا تَلَىٰهَا ﴿2﴾

और चाँद की जब उसके पीछे निकले

وَٱلنَّهَارِ إِذَا جَلَّىٰهَا ﴿3﴾

और दिन की जब उसे चमका दे

وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰهَا ﴿4﴾

और रात की जब उसे ढाँक ले

وَٱلسَّمَآءِ وَمَا بَنَىٰهَا ﴿5﴾

और आसमान की और जिसने उसे बनाया

وَٱلْأَرْضِ وَمَا طَحَىٰهَا ﴿6﴾

और ज़मीन की जिसने उसे बिछाया

وَنَفْسٍۢ وَمَا سَوَّىٰهَا ﴿7﴾

और जान की और जिसने उसे दुरूस्त किया

فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَىٰهَا ﴿8﴾

फिर उसकी बदकारी और परहेज़गारी को उसे समझा दिया

قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّىٰهَا ﴿9﴾

(क़सम है) जिसने उस (जान) को (गनाह से) पाक रखा वह तो कामयाब हुआ

وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّىٰهَا ﴿10﴾

और जिसने उसे (गुनाह करके) दबा दिया वह नामुराद रहा

كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَىٰهَآ ﴿11﴾

क़ौम मसूद ने अपनी सरकशी से (सालेह पैग़म्बर को) झुठलाया,

إِذِ ٱنۢبَعَثَ أَشْقَىٰهَا ﴿12﴾

जब उनमें का एक बड़ा बदबख्त उठ खड़ा हुआ

فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ ٱللَّهِ نَاقَةَ ٱللَّهِ وَسُقْيَـٰهَا ﴿13﴾

तो ख़ुदा के रसूल (सालेह) ने उनसे कहा कि ख़ुदा की ऊँटनी और उसके पानी पीने से तअर्रुज़ न करना

فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُم بِذَنۢبِهِمْ فَسَوَّىٰهَا ﴿14﴾

मगर उन लोगों पैग़म्बर को झुठलाया और उसकी कूँचे काट डाली तो ख़ुदा ने उनके गुनाहों सबब से उन पर अज़ाब नाज़िल किया फिर (हलाक करके) बराबर कर दिया

وَلَا يَخَافُ عُقْبَـٰهَا ﴿15﴾

और उसको उनके बदले का कोई ख़ौफ तो है नहीं

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 25 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 25 جمادى الأولى
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 26.2 / 29.5
रोशनी 12%
3 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद